क्रोध को पाले रखना गर्म कोयले को किसी और पर फेंकने की नीयत से पकड़े रहने के समान है-इसमें जलते आप ही हैं.

28 अगस्त 2011

घर का भेदी...

   स्वामी अग्निवेश...गेरुवा वस्त्रधारी...अन्ना टीम के भूतपूर्व सदस्य...सधी जबान से बात करनेवाले...लेकिन क्या निकले?सरकारी एजेंट...!!!कलियुगी जयचंद...!!!या कि विभीषण...!!!क्या कहें उन्हें...?अच्छा हुआ समय रहते अन्ना और उनकी टीम ने उन्हें पहचान लिया...और उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया...अन्यथा अन्ना की पीठ में छुरा घोंपने...उनके आंदोलन को कुचलने की पूरी तैयारी थी उनकी...सांठ-गाँठ भी किसके साथ?धूर्त कपिल सिब्बल उर्फ कपिल मूनी महराज के साथ...!!!पोल खुलने पर अब बगलें झाँक रहे हैं...बहाने बना रहे हैं...आखिर जनता को ये क्या समझते हैं...?अग्निवेशजी...जनता अब जाग चुकी है...इंतज़ार करिये अगले चुनावों का...आपकी औकात बता दी जायेगी...आपकी असलियत का पता तो जनता को तभी चल गया था जब आप नक्सलियों के गढ़ में जाकर उन्हें सलाम ठोंक कर आये थे...आप भी सुने स्वामी अग्निवेश...उर्फ कुटिल अग्निवेश की कुटिलता...
 

Share:

0 comments:

एक टिप्पणी भेजें

TRANSLATE

मेरे बारे में..

मेरी फ़ोटो
सानपाडा,नवी मुंबई, महाराष्ट्र(मूलतः वाराणसी), India

Follow by Email

© कॉपीराईट:..

ब्लॉग में उपलब्ध सामग्री के सर्वाधिकार ‘कुसुम प्रकाशन,वाराणसी’के पास सुरक्षित हैं.लेखक या प्रकाशक की लिखित अनुमति के बिना सामग्री का प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष उपयोग उक्त कॉपीराईट का उल्लंघन होगा.ऐसी स्थिति में सामग्री का दुरूपयोग करने वाले लोग कॉपीराईट उल्लंघन के दोषी माने जायेंगे.अन्य सामग्री संदर्भ सहित प्रकाशित की गई है जो कॉपीराइट के नियम से मुक्त हैं.

पाठकों की संख्या...