क्रोध को पाले रखना गर्म कोयले को किसी और पर फेंकने की नीयत से पकड़े रहने के समान है-इसमें जलते आप ही हैं.

28 नवंबर 2010

प्रकृति का गीत

ऋतुओं की रानी आई ,
लेकर पवन सुगंध I
भँवरे पीकर उड़ गए ,
फूलों का मकरंद II
               फूलों का मकरंद ,
               गंध कुछ ऐसी छाई I
               कली-कली महकी ,
               भोर ने ली अंगड़ाई II
तोता बोले डाल ,
डाल पर मैना बोले I
सुनकर मीठी तान ,
जिया गोरी का डोले II
                  फसल हुई गुलज़ार ,
                  खेत में सरसों फूले I
                  सखियाँ गायें गीत ,
                   पेड़ पे झूला झूलें II
झूलें मार पटेंग ,
हवा संग करती बातें I
भूलें राह पथिक ,
जो देखें आते-जाते II
Share:

0 comments:

एक टिप्पणी भेजें

TRANSLATE

मेरे बारे में..

मेरी फ़ोटो
सानपाडा,नवी मुंबई, महाराष्ट्र(मूलतः वाराणसी), India

Follow by Email

© कॉपीराईट:..

ब्लॉग में उपलब्ध सामग्री के सर्वाधिकार ‘कुसुम प्रकाशन,वाराणसी’के पास सुरक्षित हैं.लेखक या प्रकाशक की लिखित अनुमति के बिना सामग्री का प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष उपयोग उक्त कॉपीराईट का उल्लंघन होगा.ऐसी स्थिति में सामग्री का दुरूपयोग करने वाले लोग कॉपीराईट उल्लंघन के दोषी माने जायेंगे.अन्य सामग्री संदर्भ सहित प्रकाशित की गई है जो कॉपीराइट के नियम से मुक्त हैं.

पाठकों की संख्या...