क्रोध को पाले रखना गर्म कोयले को किसी और पर फेंकने की नीयत से पकड़े रहने के समान है-इसमें जलते आप ही हैं.

22 मार्च 2011

पतझड़ का मौसम...

जोर उनके दिल्लगी की ,
थी बहुत कम क्या करें ?
जानेवाली चीज थी तो ,
जाने का गम क्या करें ?
              आस थी कि खिल उठेंगी ,
              ठूंठ में कलियाँ मगर ,
              साल लेकर आ गया ,
              पतझड़ का मौसम क्या करें ?
ज़ख्म को इतना कुरेदा
हो गया नासूर अब ,
कुछ असर करता नहीं
घावों पे मरहम क्या करें ?
               उम्र ढलने का तकाजा
               रोशनी आँखों में कम ,
               सांस काबू में नहीं है
               फूलता दम क्या करें ?
याद जब आये तो दिल में
हूक सी उठने लगी ,
डबडबाई आँख फिर से
हो गई नम क्या करें ?
               हर चमकती चीज़ को
               सोना समझने की सज़ा ,
               छीन गयी खुशियाँ
               दिले-नादान,मातम क्या करें ?
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सानपाडा,नवी मुंबई, महाराष्ट्र(मूलतः वाराणसी), India

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