क्रोध को पाले रखना गर्म कोयले को किसी और पर फेंकने की नीयत से पकड़े रहने के समान है-इसमें जलते आप ही हैं.

25 मार्च 2011

आंसुओं की धार...

राह में बिखरे पड़े हैं ,
फूल सारे खार बनकर I
सामने आकर खड़ी है ,
जीत मेरी हार बनकर II
          बन न पाई तुम मेरे ,
          चेहरे की प्यारी सी हंसीं I
          सज न पाया मैं तुम्हारे ,
          रूप का सिंगार बनकर II
याद जब आती हो, काबू 
में नहीं रहता है दिल I
आँख से मेरे बही तुम ,
आंसुओं की धार बनकर  II
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