क्रोध को पाले रखना गर्म कोयले को किसी और पर फेंकने की नीयत से पकड़े रहने के समान है-इसमें जलते आप ही हैं.

28 अगस्त 2017

कुछ शायरियाँ-१

फिराक गोरखपुरी (मूल नाम रघुपति सहाय) उर्दू भाषा के प्रसिद्ध रचनाकार हैं । उनका जन्म गोरखपुर, उत्तर प्रदेश में कायस्थ परिवार में हुआ था । इनका मूल नाम रघुपति सहाय था । रामकृष्ण की कहानियों से शुरुआत के बाद की शिक्षा अरबी, फारसी और अंग्रेजी में हुई ।२९ जून, १९१४ को उनका विवाह प्रसिद्ध जमींदार विन्देश्वरी प्रसाद की बेटी किशोरी देवी से हुआ था ।


१. एक मुद्दत से तिरी याद भी आई न हमें, 
    और हम भूल गए हों तुझे ऐसा भी नहीं ।

२. कम से कम मौत से ऐसी मुझे उम्मीद नहीं,
    जिंदगी तून तो धोखे पे दिया है धोखा ।

३. जो उलझी थी कभी आदम के हाथों,
    वो गुत्थी आज तक सुलझा रहा हूं ।

४. बहुत पहले से उन कदमों की आहट जान लेते हैं,
    तुझे ऐ जिंदगी हम दूर से पहचान लेते हैं ।

५. गरज कि काट दिए जिंदगी के दिन ऐ दोस्त,
वो तेरी याद में हों या तुझे भुलाने में ।

६. दिल में किसी के राह किये जा रहा हूँ मैं,
कितना हसीं गुनाह किये जा रहा हूँ मैं ।

७. हमसे क्या हो सका मोहब्बत में,
खैर तुमने तो बेवफाई की ।

८. मुद्दतें गुजरी तेरी याद भी आयी न हमें,
और हम भूल गए हों तुझे ऐसा भी नहीं ।

__ फ़िराक गोरखपुरी 
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