क्रोध को पाले रखना गर्म कोयले को किसी और पर फेंकने की नीयत से पकड़े रहने के समान है-इसमें जलते आप ही हैं.

27 अक्तूबर 2010

तस्वीर

किस तरह पाता भला मै
लक्ष्य अपने चाह की,
पंख मेरे कट चुके थे    
पांव में जंजीर थी  .
           लोग ये कहते हैं होता,
           कुछ नहीं है पंख से ,
           हौसला गर हो तो मंजिल,
           चूमती पद वीर की.
  था बहुत विश्वास मन में ,
  हौसला भी खूब था ,पर ,
  उससे ज्यादा क्या मैं पाता ,
  जो मेरी तकदीर थी.
            चाहता था रंग भरना ,
            ख्वाहिशों के चित्र में ,
             नींद टूटी तो ये देखा ,
             क्या मेरी तस्वीर थी .
                                                                                                   

                                  
                               
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सानपाडा,नवी मुंबई, महाराष्ट्र(मूलतः वाराणसी), India

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