क्रोध को पाले रखना गर्म कोयले को किसी और पर फेंकने की नीयत से पकड़े रहने के समान है-इसमें जलते आप ही हैं.

27 अक्तूबर 2010

नासूर

             खो गया है चाँद बदली में                                
              नज़र आता नहीं ,
              बन गया नासूर पक कर घाव ,
               भर पाता नहीं .
                       खो गई हैं मंज़िलें दुनिया की
                       अंधी दौड़ में ,
                       कौन है अपना,पराया कौन ?
                        नज़र आता नहीं .
              लुट चुके जज्बात जिन्दा ,
              मिट चुकी है ख्वाहिशें ,
              एक जिन्दा लाश हूँ,तो क्यूँ मैं
              मर जाता नहीं ?

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