क्रोध को पाले रखना गर्म कोयले को किसी और पर फेंकने की नीयत से पकड़े रहने के समान है-इसमें जलते आप ही हैं.

30 अक्तूबर 2010

तुम मिली मुझको.....


जानते हैं सब कि मैली

चाँदनी होती नहीं ,
पास जाकर जब मैं देखा ,
चाँद में ही दाग था .
           बाग में थी अनगिनत
           रंगीन कलियाँ बेशुमार ,
           चुनकर उससे लिया जो
           पुष्प मैं, बेदाग़ था .
हैं भटकते लोग जीवनभर
मगर पाते नहीं ,
तुम मिली मुझको ये मेरा ,
पुण्य था, सौभाग था .

Share:

0 comments:

एक टिप्पणी भेजें

TRANSLATE

मेरे बारे में..

मेरी फ़ोटो
सानपाडा,नवी मुंबई, महाराष्ट्र(मूलतः वाराणसी), India

Follow by Email

© कॉपीराईट:..

ब्लॉग में उपलब्ध सामग्री के सर्वाधिकार ‘कुसुम प्रकाशन,वाराणसी’के पास सुरक्षित हैं.लेखक या प्रकाशक की लिखित अनुमति के बिना सामग्री का प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष उपयोग उक्त कॉपीराईट का उल्लंघन होगा.ऐसी स्थिति में सामग्री का दुरूपयोग करने वाले लोग कॉपीराईट उल्लंघन के दोषी माने जायेंगे.अन्य सामग्री संदर्भ सहित प्रकाशित की गई है जो कॉपीराइट के नियम से मुक्त हैं.

पाठकों की संख्या...