क्रोध को पाले रखना गर्म कोयले को किसी और पर फेंकने की नीयत से पकड़े रहने के समान है-इसमें जलते आप ही हैं.

24 नवंबर 2010

बिहार का रहस्य(यथा लालू..)

   दोस्तों ,बिहार विधानसभा चुनाव का परिणाम आने के बाद टी.वी.पर समाचार देख रहा था.लालू और पासवान मीडिया को संबोधित कर रहे थे.यथा लालू,ये परिणाम रहस्यमय हैं और वे इस रहस्य का  पता लगाएंगे.हार की खिसियाहट उनके चेहरे पर साफ झलक रही थी.उधर स्टार न्यूज़ के दीपक चौरसिया पटना में जनता से रूबरू हो रहे थे.जनता से की गई बातचीत में दो लोगों की तरफ बरबस ध्यान चला गया.और अनजाने में ही मुझे उस रहस्य का पता चल गया जिसकी चर्चा लालू बार-बार कर रहे थे.एक था गरीब रिक्शेवाला जिसके हाथ में बड़ा सा रेडियो था, जिसका सेल निकालकर उसने  जेब में रखा था,और दूसरा विद्यार्थी.दोनों की बातचीत का कुछ अंश मैं यहाँ प्रस्तुत कर रहा हूँ.इससे आपको भी उस रहस्य का पता चल जायेगा जिसके चलते लालू और पासवान इस बार के चुनाव में औंधे मुंह गिर पड़े.
                                               १. गरीब रिक्शेवाला
दीपक:क्या भईया ,क्या नाम है आपका ?
रिक्शेवाला:(दांत निपोरकर हँसता है...)
नितीश फिर आ गए कुछ कहना चाहते हो ?
नितीश...? उ त राजा है ..राजा..
खुश हो ?
अ तब का ...? बहुतै खुश हैं...उ त भगवान हैं हमरे...भगवान.....
भगवान हैं..?
आउर का..?
क्या काम करते हो..?
रिक्शा चलाता हूँ...
नितीश के आने से खुश हो..?
अरे दादा बोले न कि बहुतै खुश हैं....मईकिया दांते से सटा देंगे का...?
क्यों...लालू के समय खुश नहीं थे..?
नाही साहब ....लालू के समय तो खूबे परेशान रहते थे...
काहें...?
उ जब हम रिक्शा चलाय के लउटें तब ओनकर अदमी हमार पईसा छोल लेत रहें...
कौन लोग रहते थे वे...?
उहे गाय-भईंस चरावे वाले...
अब नहीं छीनते..?
बिलकुल नाही.....
                                                २. विद्यार्थी
दीपक: क्या भई,क्या करते हो..?
पढ़ता हूँ...
कौन से विद्यालय में पढ़ते हो..?
‘..................................................’
नितीश के बारे में क्या कहोगे..?फिर से आ गए....
वो तो आना था....(फिर थोड़ा हंसी-मजाक...)
अच्छा ये बताओ...खुश हो..?
बहुत खुश हैं.....
क्या कारण है....?
कारण क्या...अच्छे से पढ़ाई हो रही है..शिक्षक रेगुलर आते हैं ....घंटी बजते ही कक्षा में हाजिर....
तो पहले ऐसा नहीं था क्या..?
नहीं...पहले शिक्षक हफ़्तों तक नहीं आते थे....औ जब बुलाने जाते थे...तो डांटकर भगा देते थे...
अब तो ऐसा नहीं है न..?
एकदम्मे नहीं....बल्कि अब तो अच्छा नंबर लाने पर प्रोत्साहन भत्ता मिलता है...लालू के समय कुच्छौ नहीं मिल रहा था...मैंने बैंक में खाता खुलवा लिया है....लड़कियों को साईकिल मिली है......
       तो दोस्तों, आप इस रहस्य को जान पाए या नहीं..?

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