क्रोध को पाले रखना गर्म कोयले को किसी और पर फेंकने की नीयत से पकड़े रहने के समान है-इसमें जलते आप ही हैं.

2 दिसंबर 2010

यौवन रस...

दीपक संग पतंगा जैसे ,
सागर संग हिलोर है I
फूल में जैसे खुशबू ,
जैसे चंदा संग चकोर है II
                वैसे प्यार तुम्हारा मेरे ,
                रोम-रोम से छलक रहा I
                अंग-अंग से प्यार लुटाने 
                 को पागल मन ललक रहा II
दग्ध ह्रदय की ज्वाला को ,
कब तक ऐसे भड़काओगे ?
चैन मिलेगा तुमको जब तुम 
बाहों में आ जाओगे II
                मरुभूमि पर शीतल जल की ,
                धार गिरी कुछ मान धरो I
                प्यास बुझा लो अधरों की ,
                यौवन रस का रसपान करो II

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सानपाडा,नवी मुंबई, महाराष्ट्र(मूलतः वाराणसी), India

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