क्रोध को पाले रखना गर्म कोयले को किसी और पर फेंकने की नीयत से पकड़े रहने के समान है-इसमें जलते आप ही हैं.

3 दिसंबर 2010

ख्वाहिशें..

ख्वाहिशें बेशुमार बाकी हैं I
रास्तों में बहार बाकी है I
क्या हुआ आज गर अँधेरा है ,
रोशनी की कतार बाकी है II
                   मेरे भावों में आग तुझसे है ,
                   मेरे गीतों का राग तुझसे है ,
                   बेअसर है जो हर हवाओं से ,
                   लेखनी में वो धार बाकी है II
मोगरों के महकते फूलों पर ,
डालियों से लटकते झूलों पर ,
जो पिलायी थी तुमनें आँखों से ,
अब तलक वो खुमार बाकी है II
                    याद गुजरे हुए जमाने का ,
                    मेरी बाँहों में सिमट जाने का ,
                     फिर से प्यारे हसीन लम्हों को ,
                     मुझको दे दो उधार,बाकी है II
यूं न मुझसे कभी खफा होना ,
तू न मुझसे कभी जुदा होना ,
दूर कितना भी मैं रहूँ तुझसे ,
जिंदगी तुझसे प्यार बाकी है II

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सानपाडा,नवी मुंबई, महाराष्ट्र(मूलतः वाराणसी), India

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