क्रोध को पाले रखना गर्म कोयले को किसी और पर फेंकने की नीयत से पकड़े रहने के समान है-इसमें जलते आप ही हैं.

5 दिसंबर 2010

कलियुग..

कलियुग की जीवनशैली में ,
बच्चे खुद को ढाल रहे I
मम्मी-पापा के बदले अब ,
कुत्ते-बिल्ली पाल रहे II
            रहन-सहन रुतबे को लेकर ,
            जो रईस कहलाते हैं I
            शाम-सवेरे बाग में अपने
             ‘पप्पी’ को टहलाते हैं II
बुढ़ा बाप दवाखाने तक ,
पैदल चलके जाता है I
प्यारा ‘पप्पी’ साहेब की
गाड़ी में मौज उड़ाता है II
            बुढ़ी माँ खटिया पर लेटे ,
            खांस-खांस बेज़ार रही I
            बहू कटोरा दूध का लेकर
            ‘पप्पी’ को पुचकार रही II
‘पप्पी’ हुआ बीमार तो बेटा
सेवा में लग जाता है I
माता हुई बीमार तो जैसे
मुश्किल में पड़ जाता है II
            जिन बच्चों को पेट काटकर,
            पाल-पोसकर बड़ा किये I
            खुद के सपने मार दिए ,
            उनके सपनों को खड़ा किये II
सेवा की बारी आई तो ,
रिश्ते-नाते तोड़ दिए I
हाथ पकड़कर मात-पिता को ,
‘बृद्धाश्रम’में छोड़ दिए II
Share:

1 टिप्पणी:

  1. पूरानी बातों को नए कलेवर में अच्‍छी प्रकार से प्रस्‍तुत किया है। बधाई।

    उत्तर देंहटाएं

TRANSLATE

मेरे बारे में..

मेरी फ़ोटो
सानपाडा,नवी मुंबई, महाराष्ट्र(मूलतः वाराणसी), India

Follow by Email

© कॉपीराईट:..

ब्लॉग में उपलब्ध सामग्री के सर्वाधिकार ‘कुसुम प्रकाशन,वाराणसी’के पास सुरक्षित हैं.लेखक या प्रकाशक की लिखित अनुमति के बिना सामग्री का प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष उपयोग उक्त कॉपीराईट का उल्लंघन होगा.ऐसी स्थिति में सामग्री का दुरूपयोग करने वाले लोग कॉपीराईट उल्लंघन के दोषी माने जायेंगे.अन्य सामग्री संदर्भ सहित प्रकाशित की गई है जो कॉपीराइट के नियम से मुक्त हैं.

पाठकों की संख्या...