क्रोध को पाले रखना गर्म कोयले को किसी और पर फेंकने की नीयत से पकड़े रहने के समान है-इसमें जलते आप ही हैं.

11 जून 2011

दिग्गी और पागलखाना

  छोटी सी बात.लेकिन बेहद महत्वपूर्ण.कल अन्ना के महाराष्ट्र पहुँचने पर किसी पत्रकार ने उनसे कहा.."अन्ना,दिग्विजय लगातार कह रहे हैं कि अन्ना के आन्दोलन के पीछे आर एस एस है.इस बारे में आप कुछ कहेंगे?"....अन्ना का जवाब...
   "देखो...पूने में येरवडा में एक पागलों का दवाखाना है...उनको उधर इलाज के लिए भर्ती करना पड़ेगा..."
  टिप्पणी पर गौर करिए...ये मामूली बात नहीं है...ये उस व्यक्ति के बारे में है जो कांग्रेस का महासचिव है...और उस व्यक्ति के द्वारा कही गई है जो स्वभाव से बेहद शांत है...इस कथन से साफ़ जाहिर होता है कि सरकार और आन्दोलनकारियों के बीच तल्खी कितनी बढ़ चुकी है.अगर दिग्गी के बौखलाहट और बिना सर-पैर के बयानबाजी से अन्ना ऐसा बोले,तो अंदाजा लगाया जा सकता है कि आम जनता में दिग्गी के लिए कितना रोष पैदा हो चूका है...तो क्या अब दिग्गी की जगह येरवडा का पागलखाना ही है?
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