क्रोध को पाले रखना गर्म कोयले को किसी और पर फेंकने की नीयत से पकड़े रहने के समान है-इसमें जलते आप ही हैं.

26 जून 2011

चोरों के सरदार...

उलटे-सीधे दाव चल रहे,कैसे सिब्बल भईया I
 अन्ना रहे ख्याल,न जाए डूब तुम्हारी नईया II

डूब न जाए नईया,सब शातिर मक्कार I
 दिग्गी,सिब्बल लगते चोरों के सरदार II

चोरों के सरदार,दिख रहे ऐंठे-ऐंठे I
 मनमोहन चूहे की भांति बिल में बैठे II

बिल में बैठे,चमचे उनके दांत निपोरें I
 लोकपाल के बदले दें आश्वासन कोरे II

जनता के पैसे को जमकर लूटा-खाया I
 उजले दामन पर ये कैसा दाग लगाया ?

कलयुग का है खेल,हुआ राजा कंगाल I
 सेवक थे जो,आज हो गए मालामाल II
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